Explainer: अगर भारत अमेरिकी दबाव में रूस से तेल लेना बंद कर दे तो क्या होगा
Source: News18 Hindi | Original Published At: 2025-08-01 18:49:24 UTC
Key Points
- भारत को रूस से सस्ते तेल की आपूर्ति बंद होने पर ईंधन कीमतों में वृद्धि होगी
- ऊर्जा आपूर्ति में कमी या अनिश्चितता औद्योगिक उत्पादन और उपभोक्ता लागत प्रभावित करेगी
- विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा क्योंकि अन्य देशों से तेल खरीदी डॉलर में होगी
- रूस के साथ संबंधों में तनाव से रक्षा आपूर्ति और सामरिक सहयोग प्रभावित हो सकता है
- रूस-चीन गठजोड़ मजबूत होने से भारत के लिए क्षेत्रीय भू-राजनीति में चुनौतियां बढ़ेंगी
अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल लेना बंद कर दे. पिछले कुछ हफ्तों से भारतीय रिफायनरीज कंपनियां रूस से कम तेल मंगाने लगीं थीं. ये खबरें भी हैं कि भारत ने अपनी सरकारी तेल कंपनियों से रूस से तेल लेना बंद करने को कहा है.
भारत ने 2023 में यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से तेल लेना शुरू किया है. भारत और चीन रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं. रूस से सस्ता तेल बंद होने से भारत में ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी, जिसका असर मुद्रास्फीति, परिवहन लागत और सारी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
भारत 80% से अधिक ऊर्जा आयात पर निर्भर करता है. रूस के विकल्प के रूप में अन्य देशों से तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने में समय और संसाधन लगेंगे. विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित हो सकता है क्योंकि अन्य देशों से तेल खरीदने के लिए डॉलर में भुगतान करना होगा.
रूस से तेल आयात बंद करने से दोनों देशों के बीच विश्वास में कमी आ सकती है. भारत की रक्षा आपूर्ति (जैसे S-400 मिसाइल सिस्टम) और अन्य सामरिक सहयोग प्रभावित हो सकता है. रूस-चीन गठजोड़ मजबूत होने से भारत-चीन सीमा तनाव और क्षेत्रीय भू-राजनीति में जटिलताएं बढ़ सकती हैं.
रूस से तेल आयात बंद करने से भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की छवि कमजोर हो सकती है. भारत की BRICS, G20 और SCO जैसे मंचों में प्रभावशाली भूमिका कमजोर हो सकती है.