चीन राष्ट्रपति ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने के लिए राष्ट्रपति मुर्मू को लिखी थी सीक्रेट चिट्ठी
Source: News18 Hindi | Original Published At: 2025-08-28 09:16:40 UTC
Key Points
- चीन राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को गोपनीय पत्र भेजा
- भारत-चीन सीमा विवाद सुलझाने के प्रयास जारी हैं, जिसमें बैक-चैनल बातचीत और सैनिक पीछे हटाव शामिल
- मोदी की चीन यात्रा शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समित के दौरान होगी
- चीन ने उर्वरक और दुर्लभ धातुओं की आपूर्ति का आश्वासन दिया है
- चीनी पर्यटकों के लिए भारत ने वीजा जारी किए हैं
एक भारतीय अधिकारी ने ब्लूमबर्ग को बताया कि पत्र में अमेरिकी सौदों से चीन के हितों को नुकसान को लेकर चिंता जताई गई थी और एक प्रांतीय अधिकारी को बीजिंग के प्रयासों का नेतृत्व सौंपा गया. यह संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचा. फिर जून तकशुरू की. यह वही समय था जब भारत की अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताएं तनाव पूर्ण हो गईं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को जापान-चीन के दौरे पर रवाना हो रहे हैं. पीएम सात साल बाद चीन जा रहे हैं. करीब पांच साल पहले गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प के बाद रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए थे. लेकिन, बीते कुछ महीनों से दोनों देश रिश्तों में सुधार की कोशिश कर रहे हैं. इसी कड़ी में पीएम मोदी चीन जा रहे हैं. लेकिन, दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ यूं ही नहीं पिघली है. इससे पीछे के भी कई रहस्य छिपे हैं. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस साल मार्च में जब डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ व्यापार युद्ध तेज किया, तबने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक गोपनीय पत्र भेजा था. यह पत्र संबंध सुधारने की कवायद का पहला कदम था. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में इस सीक्रेट पत्र को लेकर लंबा लेख छपा है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के टैरिफ ने भारत के 86 अरब डॉलर के अमेरिकी निर्यात को खतरे में डाल दिया है, जो जीडीपी का 2 प्रतिशत है. मई में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद ट्रंप के मध्यस्थता के दावों से दिल्ली में रोष बढ़ा. अगस्त में, दोनों देशों ने 2020 के घातक सीमा संघर्ष से आगे बढ़ते हुए सीमा विवाद सुलझाने के प्रयास दोगुने करने पर सहमति जताई. यह विवाद औपनिवेशिक काल से चला आ रहा है. इस सप्ताह मोदी शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) समिट के लिए चीन जा रहे हैं. वहां वहसे मिलेंगे. यह त्रिपक्षीय गठजोड़ अमेरिका के लिए चिंता का विषय है.
गलवान संघर्ष के बाद रिश्ते सुधारने पर जोरवर्ष 2020 के गलवान संघर्ष के बाद बीते साल जनवरी में मोदी ने चीन के साथ तनाव कम करने की कोशिश की थी. इसके बाद बैक चैनल बातचीत चलती रही. फिर 2023 के मध्य से दोनों पक्षों ने सैनिक पीछे हटाने पर मतभेद कम किए, लेकिन मामूली मुद्दों से समझौता विफल रहा. इस कारण 2023 के जोहान्सबर्ग BRICS समिट में शी-मोदी बैठक रद्द हो गई. फिर रूस के कजान में यह मुलाकात संभव हो सकी. इस साल मार्च के पत्र के बाद शी जिनपिंग ने संबंधों को ‘ड्रैगन-एलीफेंट टैंगो’ कहा. उपराष्ट्रपति हान झेंग जैसे अधिकारियों ने इसे दोहराया. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और सीमा वार्ताओं के विशेष प्रतिनिधि अजीत डोभाल चीन के नेतृत्व से सीधे संपर्क रखते हैं. उन्होंने दिसंबर 2024 और जून 2025 में चीन की यात्रा की. जुलाई में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बीजिंग में चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की. चीन ने उर्वरक और रेयर अर्थ मैटेरियल की आपूर्ति का आश्वासन दिया. उसके बाद प्रत्यक्ष उड़ानें अगले महीने से फिर शुरू होंगी. यूरिया शिपमेंट पर प्रतिबंध ढीले हुए. मोदी सरकार ने चीनी पर्यटकों के लिए वीजा दिए.