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भारत को BRICS से कितना फायदा, इस बार सबकी नजरें PM मोदी पर क्यों? जिसकी समिट में हिस्सा लेने रूस जाएंगे

Source: TV9 Bharatvarsh | Original Published At: 2024-10-21 06:51:02 UTC

Key Points

  • पीएम मोदी 16वें ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने कज़ान (रूस) जाएंगे।
  • ब्रिक्स सम्मेलन 22-23 अक्तूबर 2024 को होगा, जिसकी अध्यक्षता रूस करेगा।
  • ब्रिक्स के 5 नए सदस्यों के शामिल होने से समूह की जनसंख्या 3.5 बिलियन हो गई है।
  • ब्रिक्स सदस्य देश वैश्विक तेल उत्पादन का 44% हिस्सा उत्पादित करते हैं।
  • भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के माध्यम से पश्चिमी आधिपत्य को चुनौती दे रहा है।
  • रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर भारत की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय नजरें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल दूसरी बार रूस जा रहे हैं, जहां वह 16वें ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) में हिस्सा लेंगे। वोल्गा नदी के किनारे तातारस्तान की राजधानी कजान में 22 और 23 अक्तूबर को होने वाले इस सम्मेलन की अध्यक्षता रूस करेगा। पिछले साल ब्रिक्स के विस्तार के बाद हो रहा यह पहला सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आइए जान लेते हैं कि ब्रिक्स क्या है और यह भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है?

ब्रिक्स एक अंतर सरकारी अनौपचारिक संगठन है। इसमें शामिल देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका को मिलाकर BRICS बना है। वैसे साल 2009 में रूस की पहल पर BRIC की स्थापना की गई थी, जिसमें दक्षिण अफ्रीका शामिल नहीं था। अगले ही साल यानी 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने से यह ब्रिक्स हो गया। ब्रिक्स का शिखर सम्मेलन हर साल होता है, जिसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेते हैं।

पिछले साल इसका आयोजन साउथ अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में हुआ था। तब मिस्र, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को भी ब्रिक्स की सदस्यता दे दी गई। सऊदी अरब अभी इसका आमंत्रित सदस्य है। इस विस्तार के बाद ब्रिक्स सम्मेलन रूस के कजान में हो रहा है।

ब्रिक्स का लक्ष्य खुला, ट्रांसपैरेंट, भेदभाव रहित और नियम आधारित बहुकोणीय ट्रेडिंग सिस्टम विकसित करना है। ये अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिका डॉलर को किनारे करना चाहते हैं। इसलिए सभी देश आपस में एक-दूसरे से व्यापार के लिए अपनी-अपनी मुद्रा के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। ब्रिक्स की एक कॉमन करेंसी पर भी चर्चा होती रही है पर इस पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है।

भारत हमेशा से ब्रिक्स जैसे संगठनों के लिए प्रतिबद्ध रहा है। यह वास्तव में एक बहुध्रुवीय दुनिया देखना चाहता है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मसलों पर पश्चिमी देशों का आधिपत्य न हो। पिछले साल ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इसका स्पष्ट संदेश भी दे चुके हैं कि दुनिया अब बहुध्रुवीय है और अब इसे पुराने नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

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