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Explainer: अगर BRICS के तीन बड़े देश भारत, चीन और ब्राजील अमेरिका से व्यापार बंद कर दें तो क्या होगा?

Explainer: अगर BRICS के तीन बड़े देश भारत, चीन और ब्राजील अमेरिका से व्यापार बंद कर दें तो क्या होगा?"
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Source: News18 Hindi | Original Published At: 2025-07-31 10:29:56 UTC

Key Points

  • अमेरिका चीन का सबसे बड़ा निर्यात बाजार ($575 बिलियन) है, जबकि आयात केवल $150-170 बिलियन
  • भारत अमेरिका को $75-80 बिलियन का सामान निर्यात करता है, जिसमें आईटी सेवाएं प्रमुख हैं
  • ब्राजील अमेरिका को $35-40 बिलियन का कृषि एवं खनिज निर्यात करता है
  • तीनों देशों के व्यापार बंद करने से चीन में लाखों फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं
  • भारत की $250 बिलियन की आईटी इंडस्ट्री को भारी नुकसान होगा
  • अमेरिका में महंगाई बढ़ेगी और फार्मा लागत बढ़ सकती है

ट्रंप ने पहले ही कहा था कि वो ब्रिक्स को खत्म करना चाहते हैं, क्योंकि वो अमेरिका और अमेरिकी डॉलर दोनों के लिए खतरा हैं. इसके बाद उन्होंने ब्रिक्स के तीन बड़े देशों चीन, ब्राजील और भारत पर मोटा टैरिफ लगा दिया है. अगर ये तीनों देश अमेरिकी दबाव में नहीं आएं और अमेरिका से व्यापार बंद कर दें क्या होगा. ये इस समय पूरी दुनिया खासकर ब्रिक्स देशों में पूछा जा रहा है. यह सवाल सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति, डॉलर की प्रभुता, सप्लाई चेन के भविष्य और विश्व के आर्थिक संतुलन को भी झकझोर सकता है.

अमेरि�का के साथ तीनों देशों का कितना व्यापार

चीन – BRICS समूह में चीन, भारत और ब्राजील का अमेरिकी बाजार के साथ गहरा रिश्ता है. अमेरिका चीन का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. चीन हर साल अमेरिका को लगभग $575 बिलियन का सामान निर्यात करता है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, मशीनरी, खिलौने और कपड़े प्रमुख हैं. बदले में अमेरिका केवल $150-170 बिलियन के आसपास आयात करता है, मुख्य रूप से तकनीक, विमान और कृषि उत्पाद.

भारत – अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. भारत अमेरिका को सालाना $75-80 बिलियन के आसपास सामान और सेवाएं भेजता है – खासकर आईटी सेवाएं, दवाएं, टेक्सटाइल और जेम्स-ज्वेलरी. अमेरिका से आयात करीब $40-50 बिलियन तक है – रक्षा उपकरण, तेल, टेक्नोलॉजी उत्पाद और सोयाबीन.

ब्राजील – अमेरिका ब्राजील का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. ब्राजील अमेरिका को सालाना $35-40 बिलियन का सामान बेचता है – मुख्य तौर पर लौह अयस्क, कच्चा तेल, सोया, कॉफी. बदले में अमेरिका $30 बिलियन के आसपास उत्पाद आयात करता है.

व्यापार बंद करने का असर तीनों देशों पर

चीन – चीन में लाखों फैक्ट्रियों को ताला लग सकता है, क्योंकि यहां से वहां भारी मात्रा में सामान बनकर निर्यात होता है. शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ेगी. विशेष रूप से शंघाई, गुआंगझोऊ जैसे शहरों में जहां अमेरिकी ऑर्डर आधारित उद्योग चलते हैं. हुवई, शेओमी जैसी कंपनियां अमेरिकी तकनीक या चिप्स पर निर्भर हैं. आपूर्ति रुकने से उनका प्रोडक्शन धीमा हो सकता है. निर्यात कम होने से टैक्स कलेक्शन गिरेगा और फाइनेंशियल स्थिरता पर असर पड़ेगा.

भारत – आईटी सेक्टर को बहुत तगड़ा झटका लगेगा. टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल जैसी कंपनियों की करीब 60% आमदनी अमेरि�का से होती है. व्यापार ठप होने से लाखों लोगों की नौकरियों पर असर पड़ेगा. अमेरिका भारत से हर साल अरबों डॉलर की जेनेरिक दवाएं खरीदता है. अचानक सप्लाई रुकने से भारत की दवा कंपनियों को बाजार गंवाना पड़ेगा.

ब्राजील – ब्राजील अमेरिका को भारी मात्रा में सोयाबीन, मक्का, कॉफी और चीनी निर्यात करता है. व्यापार ठप होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान वर्ग सबसे पहले प्रभावित होंगे. खनिज निर्यात में गिरावट: लौह अयस्क, तेल और लिथियम जैसे खनिजों का बड़ा बाजार अमेरिका है. निर्यात कम होने से टैक्स वसूली घटेगी और बजट असंतुलन बढ़ेगा.

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