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दिसंबर में भारत आ सकते हैं पुतिन, UNGA के मंच से रूस का ऐलान; जयशंकर की हुई खूब तारीफ

Source: Hindustan | Original Published At: 2025-09-28 00:23:36 UTC

Key Points

  • रूसी विदेश मंत्री ने UNGA में घोषणा की कि पुतिन दिसंबर में भारत आ सकते हैं।
  • भारत-रूस के बीच व्यापार, सैन्य-तकनीकी सहयोग, वित्त, स्वास्थ्य, AI, SCO और BRICS पर सहयोग की बात की गई।
  • जयशंकर की प्रशंसा की गई और भारत की स्वतंत्र नीति निर्माण क्षमता पर जोर दिया गया।
  • अमेरिका के संभावित प्रतिबंधों के बावजूद भारत-रूस आर्थिक साझेदारी जारी रहेगी।

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने घोषणा की कि दिसंबर में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की योजना बनाई जा रही है। लावरोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच एक बहुत व्यापक द्विपक्षीय एजेंडा है, जिसमें कई क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। दोनों देश व्यापार, सैन्य-तकनीकी सहयोग, वित्त, मानवीय मामले, स्वास्थ्य सेवा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा उन्होंने एससीओ (SCO) और ब्रिक्स (BRICS) जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर और द्विपक्षीय रूप से करीबी समन्वय पर भी जोर दिया।

रूसी विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर की खुलकर प्रशंसा की और कहा कि भारत में तुर्की जैसा ही आत्म-सम्मान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत रूस के साथ अपने व्यापारिक संबंधों पर स्वयं निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने कहा, “मैं यह भी नहीं पूछ रहा कि हमारे व्यापारिक संबंध, हमारा तेल का क्या होने वाला है। मैं अपने भारतीय सहयोगियों से यह नहीं पूछता। वे अपने दम पर ये निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम हैं।”

उन्होंने जयशंकर के एक पुराने जवाब का हवाला देते हुए भारत के रुख की सराहना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर अमेरिका उन्हें तेल बेचना चाहता है तो वे शर्तों पर चर्चा करने को तैयार हैं, लेकिन हम रूस या अन्य देशों से जो खरीदते हैं वह हमारा अपना व्यवसाय है। इसका भारतीय-अमेरिकी एजेंडे से कोई लेना-देना नहीं है।”

रूसी विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और रूस के बीच आर्थिक साझेदारी खतरे में नहीं है, भले ही अमेरिका रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर टैरिफ लगा रहा हो। रूसी तेल आयात करने के लिए अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए कथित सेकेंडरी सैंक्शन के सवाल पर लावरोव ने कहा कि यह साझेदारी खतरे में नहीं है। उन्होंने कहा, “भारत के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपने भागीदार खुद चुनता है।”

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